हरी ॐ साईं  राम ,

हिंदू ज्योतिष शास्त्र में केतु को पापी ग्रह की संज्ञा दी गई है। हालांकि यह शुभ और अशुभ दोनों तरह के फल देता है। यह तर्क, बुद्धि, ज्ञान, वैराग्य और कल्पना आदि का कारक है। केतु के शुभ प्रभाव से मनुष्य के अंदर आध्यात्मिक गुणों का विकास होता है।
वहीं यदि कुंडली में केतु अशुभ भाव में हो तो उस व्यक्ति को कष्टकारी परिणाम मिलते हैं। इस अवस्था मे व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होती है। इसके अलावा इसकी प्रतिकूलता से दाद, खाज तथा कुष्ट रोग होते हैं।

07 मार्च 2019 को केतु ग्रह रात्रि 02:48 बजे धनु राशि में गोचर करेगा और 23 सितंबर 2020 को सुबह 05:28 बजे यह धनु राशि से वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा।

तो आइये केतु गोचर 2019 के माध्यम से जानते हैं केतु के राशि परिवर्तन का सभी 12 चन्द्र  राशियों पर क्या होगा असर ?

यह राशिफल चंद्र राशि पर आधारित है। 

मेष

केतु आपकी राशि से नौवें भाव में गोचर करेगा। कुंडली में नौवां भाव भाग्य और धर्म की विवेचना करता है। इस भाव में केतु की उपस्थिति आपके लिए कष्टकारी रह सकती है इसलिए इस समय आपको संभलकर क़दम बढ़ाने होंगे। आर्थिक क्षेत्र में नुकसान उठाना पड़ सकता है। धन की लेनदेन एवं निवेश में सावधानी बरतें अन्यथा आपको धन हानि हो सकती है। गोचर के दौरान आप पुराने ख़्यालात या फिर रुढ़िवादी विचारों के हो सकते हैं, आपके व्यवहार में भी इसका असर दिखाई पड़ेगा।

कभी आप धार्मिक स्वभाव के होंगे तो कभी इसके विपरीत आपका स्वभाव होगा। गोचर के दौरान आप किसी तीर्थस्थल पर जा सकते हैं। केतु का प्रभाव आपके घरेलू जीवन पर देखने मिलेगा।

घर में पिताजी की सेहत में कमी देखी जा सकती है अथवा उनके साथ आपका वैचारिक मतभेद हो सकता है। उनके प्रति अपने मन में हमेशा आदर का भाव रखें। लंबी दूरी की यात्रा आपके योग में दिखाई दे रही है।

जनरल उपायः काले तिल दान करें।

वृषभ

केतु आपकी राशि से आठवें भाव में प्रवेश करेगा। कुंडली में आठवां भाव आयु का भाव होता है। केतु की आठवें भाव में उपस्थिति आपके लिए ज्यादा अनुकूल नहीं है। इस दौरान आध्यात्मिक एवं गूढ़ विषयों में आपकी रुचि बढ़ेगी। स्वास्थ्य जीवन के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण रहेगा। आपकी सेहत में कमी देखी जा सकती है। स्वास्थ्य के प्रति किसी तरह की लापरवाही न बरतें बल्कि स्वास्थ्य कमज़ोर होने पर डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

वहीं वाहन चलाते समय पूरी सावधानी बरतें। नशे में गाड़ी न चलाएं, अन्यथा आपको चोट आदि लग सकती है। आर्थिक क्षेत्र में केतु का असर दिखाई पड़ेगा। इस दौरान आपकी आय में कमी हो सकती है। निजी जीवन में अपने लोगों का बुरा बर्ताव आपको तनाव की ओर धकेल सकता है। दोस्तों में भी किसी प्रकार का मनमुटाव हो सकता है।

जनरल उपायः तिल का तेल दान करें।

मिथुन

केतु आपकी राशि से सातवें भाव में संचरण करेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में सातवां भाव वैवाहिक जीवन के बारे में बताता है। इस भाव में केतु का होना आपके लिए प्रतिकूल रहेगा। वैवाहिक जीवन में आपको कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। जीवनसाथी से मनमुटाव, मतभेद या फिर विवाद हो सकता है।

इस स्थिति से बचने के लिए उनका सम्मान करें और उनकी भावनाओं को समझने का प्रयास करें। इसके अलावा उनपर बेवजह का शक न करे बल्कि उन पर भरोसा जताएं।

आर्थिक क्षेत्र में केतु अपनी क्रूर दृष्टि बनाए हुए है इसलिए संपत्ति से संबंधित विवाद पैदा हो सकते हैं। पैृतक संपत्ति को लेकर विवाद होने की संभावना है। व्यापार में भी आपको इस गोचर के दुष्परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। बिजनेस पार्टनर के साथ आपके मतभेद हो सकते हैं। कार्य में भी आपको बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

जनरल उपायः गणेश की स्तुति करें और उन्हें दुरुव घास चढाएं।

कर्क

केतु आपकी राशि से छठे भाव में गोचर करेगा। कुंडली में छठा भाव रोग, भय और क्षति का होता है। केतु के इस भाव में होना आपके लिए समस्या कारक रहेगा। इस दौरान आपको कई प्रकार की समस्याओं को सामना करना पड़ सकता है। आपके कार्य में रुकावटें आएंगी और सफलता पाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा। स्वास्थ्य जीवन में भी कई प्रकार की दिक्कते आएंगी। सेहत को लेकर आपके सचेत रहें और क्योंकि केतु के प्रभाव के कारण आपकी सेहत में गिरावट आने की संभावना है।

ऐसी स्थिति में चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। गोचर की अवधि में आपका ख़र्च बढ़ेगा। बेवजह और अनावश्यक वस्तुओं पर आपका धन ख़र्च हो सकता है। इस दौरान धन का ख़र्च सोच-समझकर करें अन्यथा आपको आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा किसी से बात करते समय शालीनता दिखाएं। किसी को अपशब्द न कहें अन्यथा किसी से आपका झगड़ा हो सकता है। इस समय अनावश्यक विवाद भी सामने आ सकते हैं।

जनरल उपायः हनुमान जी की आराधना करें।

सिंह

केतु आपकी राशि से पाँचवे भाव में जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में पाँचवां भाव बुद्धि, विद्या एवं संतान को दर्शाता है। केतु के इस भाव में होना आपके लिए शुभ संकेत नहीं है। इस अवधि में आपको आर्थिक क्षेत्र में नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए धन के मामले में सावधान रहें। किसी शख़्स पर ज़रुरत से ज़्यादा भरोसा जताना आपके लिए उचित नहीं है। प्रेम जीवन में आपको विवाद का सामना करना पड़ सकता है। लव पार्टनर को ऐसी कोई बात नहें जिससे उनका दिल दुखे। क्योंकि यह समय प्रेम के मामलों के लिए कमज़ोर है। प्रियतम की भावनाओं का समझने का प्रयास करें। यदि साथी रूठ जाता है तो उसे प्यार सा तोहफ़ा देकर मनाने की कोशिश करें और ग़लतफहमी को तुरंत दूर करें। केतु के प्रभाव से आपको बौद्धिक क्षेत्र में नुकसान उठाना पड़ सकता है।

छात्रों को पढ़ाई में ध्यान लगाना थोड़ा मुश्किल होगा। वहीं स्वास्थ्य जीवन में आपको प्रतिकूल परिणाम मिलेंगे। इस दौरान आपका स्वास्थ्य गिर सकता है। वहीं घर में बच्चों की सेहत मे कमी देखी जा सकती है। स्वस्थ्य शरीर के लिए स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील रहें और बच्चों की देखभाल करें।

जनरल उपायः भैरव देव के मंदिर में काला ध्वज चढ़ाएं।

कन्या

केतु आपकी राशि से चौथे भाव में संचरण करेगा। कुंडली में चौथा भाव माता, सुख, वृद्धि और बंधु के संबंध को बताता है। इस भाव में केतु का होना आपके लिए अनुकूल नहीं है। केतु आपके पारिवारिक जीवन में अपनी बुरी नज़र बनाए हुए है। घर में अशांति का वातावरण रह सकता है और इस दौरान माता जी की सेहत में भी कमी आ सकती है।

इसके अलावा अन्य प्रकार के भी गृह क्लेश संभव है। कार्यक्षेत्र में आपके ऊपर काम का बोझ रहेगा और आप अधिक व्यस्त दिखाई देंगे। काम के चलते आप अपने निजी जीवन को कम समय दे पाएंगे। कई बार ऐसा भी हो सकता है कि आप घर की ख़ुशियों से नदारद रहेंगे। मानसिक तनाव भी आपको अपने साये में ले सकता है। मन में एक असंतोष का भाव पैदा हो सकता है। आय की अपेक्षा ख़र्चा ज़्यादा है।

जनरल उपायः नीले पुष्प दान करें।

तुला

केतु आपकी राशि से तीसरे भाव में गोचर करेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में तीस