हरी ॐ , 

इस दिन से शुरू हो रहा है सावन, विशेष आराधना के लिए शुभ रहेंगे ये दिन

श्रावण मास हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह से प्रारंभ होने वाले वर्ष का पांचवां महीना है जो इंग्लिश कैलेंडर के अनुसार जुलाई या अगस्त माह में पड़ता है। श्रावण मास का आगमन वर्षा ऋतु के समय में होता है और सावन के इस महीने में भगवान शिव के पूजन का बड़ा महत्व है। इसी कारण ये पूरा सावन मास भगवान शिव को समर्पित है। श्रवण मॉस 10 जुलाई से शुरू होने जा रहें हैं। 
इस बार का सावन बेहद खास है क्योंकि 2017 में Shravan Somwar के दिन से शुरू होगा और सोमवार को ही समाप्त होगा। साथ ही इस बार सावन के पांच सोमवार होंगे। ये संयोग करीब 50 वर्षों बाद बन रहा है। आखिरी Shravan सोमवार के दिन रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा। 

 सावन सोमवार तिथियां

पहला सावन सोमवार
जुलाई 10, 2017
दूसरा  सावन सोमवार
जुलाई 17, 2017
तीसरा सावन सोमवार
जुलाई 24, 2017
चौथा सावन सोमवार
जुलाई 31, 2017
पाँचवां सावन सोमवार
अगस्त 7, 2017

भगवान शिव को क्यों प्रिय है सावन का महीना, जानिए विशेष महत्व

सावन माह में शिवभक्त श्रद्धा तथा भक्ति के अनुसार शिव की उपासना करते हैं। सावन माह में शिव की भक्ति के महत्व का वर्णन ऋग्वेद में किया गया है। चारों ओर का वातावरण शिव भक्ति से ओत-प्रोत रहता है। शिव मंदिरों में शिवभक्तों का तांता लगा रहता है। भक्तजन दूर स्थानों से जल भरकर लाते हैं और उस जल से भगवान का जलाभिषेक करते हैं।
सावन का यह माह शिवभक्ति और आस्था का प्रतीक माना जाता है। वर्ष 2017 में सावन माह का आरम्भ 10 जुलाई से होगा। कांवड़ियों द्वारा जल लाने की यात्रा के आरंभ की कुछ तिथियाँ होती हैं।इन्ही तिथियों पर कांवड़ियों को यात्रा करना शुभ रहता है। श्रावण मास में आने वाले सोमवार के दिनों में भगवान शिवजी का व्रत एवं पूजन विशेष फलदायी होता है।
सावन सोमवार महत्व
श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस माह में प्रत्येक सोमवार के दिन भगवान श्री शिव की पूजा करने से व्यक्ति को समस्त सुखों की प्राप्ति होती है। श्रावण मास के विषय में प्रसिद्ध एक पौराणिक मान्यता के अनुसार श्रावण मास के सोमवार व्रत, जो व्यक्ति करता है उसकी सभी इछाएं पूर्ण होती है। इन दिनों किया गया दान पूण्य एवं पूजन समस्त ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के समान फल देने वाला होता है। इस व्रत का पालन कई उद्देश्यों से किया जा सकता है।
वैवाहिक जीवन की लम्बी आयु और संतान की सुख-समृ्द्धि के लिये या मनोवांछित वर की प्राप्ति करती है। सावन सोमवार व्रत कुल वृद्धि, लक्ष्मी प्राप्ति और सुख -सम्मान देने वाले होते हैं। इन दिनों में भगवान शिव की पूजा जब बेलपत्र से की जाती है, तो भगवान अपने भक्त की कामना जल्द से पूरी करते है। बिल्व  पत्र पेड़  की जड में भगवान शिव का वास माना गया है इस कारण यह पूजन व्यक्ति को सभी तीर्थों में स्नान करने का फल प्राप्त होता है।
श्रावण सोमवार पूजा
इस व्रत का आरंभ सोमवार के दिन प्रात:काल से हो जाता है। प्रात:काल में उठने के पश्चात स्नान और नित्यक्रियाओं से निवृत होकर घर की सफाई कर, पूरे घर में गंगा जल या शुद्ध जल छिडकर, घर को शुद्ध करना चाहिए। इसके बाद घर के ईशान कोण दिशा में भगवान शिव की मूर्ति या चित्र स्थापित करना चाहिए। मूर्ति स्थापना के बाद सावन मास व्रत संकल्प लेना चाहिए। श्रावण मास में केवल भगवान श्री शंकर की ही पूजा नहीं की जाती है, बल्कि भगवान शिव की परिवार सहित पूजा करनी चाहिए।
सोमवार के व्रत में भगवान भगवान शिवजी समेत श्री गणेश जी, देवी पार्वती , (MAA MANGLA GAURI), श्री कार्तिकेय व नन्दी देव एवं नागदेव मूषक राज सभी की पूजा करनी चाहिए। पूजन सामग्री में जल, दुध, दही, चीनी, घी, शहद, पंचामृ्त,मोली, वस्त्र, जनेऊ, चन्दन, रोली, चावल, फूल, बेल-पत्र, भांग, आक-धतूरा, कमल,गट्ठा, प्रसाद, पान-सुपारी, लौंग, इलायची, मेवा, दक्षिणा चढाया जाता है। इस दिन धूप दीया जलाकर कपूर से आरती करनी चाहिए।
पूजा करने के बाद एक बार भोजन करना चाहिए.सावन के व्रत करने से व्यक्ति को दुखों से मुक्ति मिलती है और सुख की प्राप्ति होती है। सावन सोमवार व्रत सूर्योदय से शुरु होकर सूर्यास्त तक किया जाता है। व्रत के दिन सोमवार व्रत कथा सुननी चाहिए। व्रत करने वाले व्यक्ति को दिन में सूर्यास्त के बाद एक बार भोजन करना चाहिए।
जानें इस विशेष संयोग में भगवान शिव को प्रसन्न करने के उपाय ( Shiv Pooja Kaise Kare ) जिन्हें करने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।
— सावन में रोज 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ‘ऊं नम: शिवाय’ लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। अगर रोज संभव न हो तो कम से कम प्रत्येक सोमवार ऐसा करें।
— रोज सुबह घर में गोमूत्र का छिड़काव करने के साथ ही गुग्गुल धूप जलाने से घर में किसी भी तरह की परेशानी दूर हो जाती है।
— यदि विवाह में अड़चन आ रही है या विवाहित जीवन ठीक नहीं है , तो रोज शिवलिंग पर केसर मिला दूध चढ़ाएं। सावन के हर मंगलवार पर , माँ मंगला  गौरी  की पूजा उपासना करें ,समस्या दूर हो जाएगी। 
माँ को  श्रृंगार की सामग्री लाल फूल चराएं तथा ॐ गौरी शंकराये नमः मंत्र का ११ माला जप करें , सावन के हर मंगलवार को मध्य रात्रि में , निश्चित रूप से लाभ होगा। 
— घर में सुख समृद्धि बरकरार रखने के लिए सावनभर नंदी (बैल) को हरा चारा खिलाएं।
— गरीबों को भोजन कराने से घर में अन्न की कमी नहीं होती साथ ही पितरों को भी शांति मिलती है।
— धन संबंधी परेशानी है तो किसी नदी या तालाब जाकर आटे की गोलियां मछलियों को खिलाएं और ‘ऊं नम: शिवाय’ का जाप करें। धन संकट दूर होगा।
— आमदनी बढ़ाने के लिए सावन के महीने में किसी भी दिन घर में पारद शिवलिंग की स्थापना करें और उसकी यथा विधि पूजन करें इस दौरान
 ‘ऐं ह्रीं श्रीं ऊं नम: शिवाय: श्रीं ह्रीं ऐं’ इस मंत्र का 108 बार जाप करें
– Shravan Somvar Vrat रखे और विधि विधान से शिव पूजा करें और भगवान शिव को प्रसन्न करें।

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— घर में बीमारियां अधिक फैली रहती हैं तो सावन के प्रत्येक सोमवार को पानी में दूध व काले तिल डालकर शिवलिंग का अभिषेक करें। अभिषेक तांबे से न करें। इसके बाद भगवान शिव से रोग निवारण के लिए प्रार्थना करें और प्रत्येक Shravan के Somvar को रात में सवा नौ बजे के बाद गाय के  सवा पाव कच्चे दूध से शिवलिंग का अभिषेक करने का संकल्प लें।

 
Sawan में शिव पूजा करके आप भगवान शिव को खुश कर सकते हैं और साथ ही आप Shiv Puran सुनकर भी मनचाहा फल पा सकते हैं. भगवान शिव को भोले बाबा कहा जाता है क्योंकि उन्हें बड़ी ही आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है। यदि कोई भक्त सच्ची श्रद्धा से उन्हें सिर्फ एक लोटा जल भी अर्पित करे तो भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते हैं। इस बार Sawan Month के महीने में शिवपुराण में दिए इन उपायों को अपनाएं, इससे भोलेनाथ प्रसन्न होंगे और आपकी समस्या दूर करेंगे।

सावन में भगवान शिव को प्रसंन्न करने के ये हैं अचूक उपाय

भगवान शिव को रिझाने के लिए सबसे उत्तम माना जाने वाला महीना सावन है। यदि कोई भक्त सच्ची श्रद्धा से शिवजी को सिर्फ एक लोटा पानी भी अर्पित करे तो भी वे प्रसन्न हो जाते हैं। ऐसे में इस पवित्र महीने में भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के कई ऐसे उपाय बता रहे हैं जिससे आप मनवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं। हम आपको बताने का प्रयास कर रहे हैं कि आप अपनी राशि के अनुसार भगवान शिव को रिझा सकते हैं।

शीघ्र प्रसंन्न होते हैं भगवान शिव
भगवान शिव अनादि-अनंत हैं। इसलिए इन्हें अजन्मा और अनश्वर भी कहते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव सिर्फ एक लोटा जल चढ़ाने से भी प्रसन्न हो जाते हैं। भगवान शिव को तंत्र शास्त्र का देवता भी कहा जाता है। सच्चा तंत्र शास्त्र के अनुसार अगर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कुछ विशेष उपाय किए जाएं तो उसका बहुत ही जल्दी शुभ फल प्राप्त होता है।
ये होता है शिवलिंग अभिषेक के फल:
सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें।

 चंदन का तिलक लगाएं और बेल पत्र, धतूरा, फल, फूल आदि चढ़ाएँ।

घी या तेल का दीया जलाएं।
-सावन सोमवार व्रत कथा व शिव चालीसा का पाठ करके मंगल आरती गाएं।
-व्रत के दिन सुबह और शाम भगवान शिव की आराधना करें।
– दूध से अभिषेक करने पर परिवार में कलह, मानसिक पीड़ा में शांति मिलती है।
– घी से अभिषेक करने पर वंशवृद्धि होती है।
– इत्र से अभिषेक करने पर भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।
– जलधारा से अभिषेक करने पर मानसिक शान्ति मिलती है।
– शहद से अभिषेक करने पर परिवार में बीमारियों का अधिक प्रकोप नहीं रहता।
– गन्ने के रस की धारा डालते हुये अभिषेक करने से आर्थिक समृद्धि व परिवार में सुखद माहौल बना रहता है।
– गंगा जल से अभिषेक करने पर चारो पुरूषार्थ की प्राप्ति होती है।
– अभिषेक करते समय महामृत्युंजय का जाप करने से फल की प्राप्ति कई गुना अधिक हो जाती है।
– सरसों के तेल से अभिषेक करने से शत्रुओं का शमन होता।
बुखार होने पर भगवान शिव को जल चढ़ाएं।

घर में सुख व संतान वृद्धि के लिए भी जल द्वारा भगवान शिव की पूजा उत्तम बताई गई है।

तीक्ष्ण बुद्धि के लिए शक्कर मिला दूध भगवान शिव को चढ़ाएं।

-शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाया जाए तो सभी आनंदों की प्राप्ति होती है।

-गंगा जल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।

-शहद से भगवान शिव का अभिषेक करने  परिवार में बीमारियों का अधिक प्रकोप नहीं रहता , टीबी जैसे रोग में आराम मिलता है।

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-यदि कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से कमजोर है तो उसे उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिएभगवान शिव का अभिषेक गौ माता के शुद्ध घी से करना चाहिए ।
कर्जमुक्ति के लिए – शहद
संतान  प्राप्ति के लिए – दूध
शनि बाधा निवारण के लिwwए – सरसों तेल
शीघ्र विवाह के लिए – पंचामृत
धनवृद्धि के लिए – बिल्व पत्र से सहस्त्रार्चन
ग्रह बाधा निवारण के लिए – दूध, दही व शक्कर मिलाकर
परेशानियों से मुक्ति के लिए – शमी पत्र से शिर्वाचन
आरोग्यता के लिए – गंगाजल से अभिषेक
नोट : दूध , जल , तेल  या कोई भी पदार्थ , एक चमच या कुछ बूंदें ही डालें , भर भर कर लोटे या बाल्टियां नहीं डालें , बचा हुआ किसी ज़रूरतमद को को दान कर दें।  
 
याद  रखिये , भगवान ईश्वर को दूध या कोई पदार्थ नहीं चाहिए  , उन्हें सिर्फ  और सिर्फ सच्ची श्रद्धा चहिये 
 
विभिन्न फूलों से मिलते अनेकों लाभ :

* लाल व सफेद फूल या शमी वृक्ष के पत्तों से पूजन से भगवान शिव का पूजन करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।

*चमेली के फूल से पूजन करने पर वाहन सुख मिलता है।
*अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने पर मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है।
*बेला के फूल से पूजन करने पर सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है।
*जूही के फूल से भगवान शिव का पूजन करें तो घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।
*कनेर के फूलों से भगवान शिव का पूजन करने से नए वस्त्र मिलते हैं।
*हरसिंगार के फूलों से पूजन करने पर सुख-सम्पत्ति में वृद्धि होती है।
*धतूरे के फूल से पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य संतान प्राप्त करते  हैं, जो कुल का नाम रोशन करती  है।
 लाल डंठलवाला धतूरा शिव पूजन में शुभ माना गया है।
*दूर्वा से भगवान शिव का पूजन करने पर आयु बढ़ती है।

केतकी के फूल कभी भी शिवलिंग पर ना चराएं 

पूजन में रखे इन बातों का ध्यान

– सावन के महीने में शिवलिंग की करें पूजा
– शिवलिंग जहां स्थापित हो पूवज़र्् दिशा की ओर मुख करके नहीं बैठें
– शिवलिंग के दक्षिण दिशा में ही बैठकर पूजन करें
– बिल्वपत्र चढ़ाने से जन्मान्तर के पापों व रोग से मुक्ति मिलती है।
– कमल पुष्प चढ़ाने से शान्ति व धन की प्राप्ति होती है।
– कुशा चढ़ाने से मुक्ति की प्राप्ति होती है।
– दूर्वा चढ़ाने से आयु में वृद्धि होती है।
– धतूरा अर्पित करने से संतान  की प्राप्ति व सुख मिलता है।
– कनेर का पुष्प चढ़ाने से परिवार में कलह व रोग से निवृत्ति मिलती हैं।