HARI OM ,
 
There are few misconceptions related to Mercury retrograde. It is generally said that Mercury retrograde brings hardships and a lot of trouble in your life, but in reality this is not true. A Mercury retrograde doesn’t always bring misfortune. On the contrary, it can bring a lot of happiness and prosperity in your life.Generally, several assumptions are formed for the planets becoming retrograde. Mostly it is assumed that the occurrence leads to regression or moving backwards and additional problems in life. But consider the fact that in reality it is not possible for planets to start moving backwards or in the opposite direction. In the solar system all the planets are moving in their respective orbits. If any planet speeds up and overtakes any other planet, then it is called a transit. Similarly, if the planet is overtaken by other planets due to its slow speed then it is called retrograding. Later, when this slower planet starts to speed up again, then it is called Direct or ‘Margi’ in Hindi.

Being closest to the Sun, the planet Mercury turns retrograde, transits or turns Direct sooner than all the other planets. According to Vedic Astrologers, Mercury retrograde has both positive and negative effects. However, the exact impact is calculated on the basis of Mercury’s relationship and position with other planets. In astrology, Mercury is considered to be an auspicious planet; however, due to the influence of other inauspicious and harsh planets, it can produce adverse effects.

Mercury is considered to be the driving factor for intelligence, speech, transmission, and senses. Hence, the retrograde Mercury has negative consequences on the person’s intelligence, speech and communication, leading to drastic changes in his/her personality. The person’s thoughts and feelings change, and his/her decision making capability is also affected negatively.

बुध ग्रह के वक्री होने पर अक्सर लोगों के मन में एक गलत धारणा रहती है कि, यदि बुध वक्री हुआ तो जीवन में संघर्ष और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन वास्तव में यह धारणा सही नहीं है। क्योंकि यह आवश्यक नहीं है कि कोई भी ग्रह जब वक्री होता है तो जीवन में परेशानियां उत्पन्न करता है। इसके विपरीत कुछ ग्रहों के वक्री होने के प्रभाव से जीवन में खुशहाली और समृद्धि आती है।

दरअसल ग्रहों के वक्री होने के बारे में कुछ गलत अर्थ निकाल लिये जाते हैं। किसी ग्रह का वक्री होना उसके उल्टा या पीछे चलने से नहीं है यानि जब कोई ग्रह वक्री होता है तो वह विपरीत दिशा में गमन नहीं करता है। क्योंकि कोई भी ग्रह अपने परिभ्रमण पथ पर कभी उल्टा या पीछे की ओर नहीं चलता है। सौरमंडल में सूर्य के चारों ओर सभी ग्रह अपनी कक्षा में एक निश्चित गति से घूमते हैं। जब कोई ग्रह अपनी तेज गति से किसी अन्य ग्रह को पीछे छोड़ देता है तो उसे अतिचारी कहा जाता है। वहीं जब कोई ग्रह अपनी धीमी गति के कारण पीछे की ओर खिसकता हुआ प्रतीत होता है तो उसे वक्री कहते हैं। इसके बाद जब वह पुन: आगे बढ़ते हुआ दिखाई देता है तो उसे मार्गी कहा जाता है।

सूर्य के सबसे समीप होने की वजह से बुध ग्रह बहुत कम समय में वक्री, मार्गी और अतिगामी होता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार बुध ग्रह के वक्री होने पर अच्छे और बुरे दोनों तरह के परिणाम देखने को मिलते हैं। हालांकि इसका निर्धारण अन्य ग्रहों के साथ बुध के संबंध और विभिन्न भावों में उसकी स्थिति के आधार पर होता है। ज्योतिष में बुध को एक शुभ ग्रह माना गया है लेकिन अशुभ अथवा क्रूर ग्रहों के संपर्क में आने पर यह अशुभ प्रभाव देने लगता है। बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, संचार और चेतना का कारक कहा जाता है। बुध ग्रह वक्री होने पर जातक की बुद्धि, वाणी और संवाद कौशल को प्रभावित करता है। ऐसी स्थिति में जातक के स्वभाव में परिवर्तन देखने को मिलता है। इसके फलस्वरुप विचारों में भिन्नता आने लगती है। इसके अलावा बुध के वक्री होने से जातक के विचारों में परिवर्तन और निर्णय लेने की क्षमता भी प्रभावित होने लगती है। 

वर्ष 2018 में बुध के वक्री होने का समय और तारीख

बुध ग्रह एक वर्ष में सामान्यत: 3 से 4 बार वक्री होता है। नीचे दी गई तालिका में पढ़ें वर्ष 2018 में बुध वक्री होने की तारीखें और समय।

23 मार्च 2018 (शुक्रवार) 5:49 – 15 अप्रैल 2018 (रविवार) 14:50 बजे
26 जुलाई 2018 (गुरुवार) 10:32 – 19 अगस्त 2018 (रविवार) 9:55 बजे
17 नवंबर 2018 (शनिवार) 7:04 – 7 दिसंबर 2018 (शुक्रवार) 02:52 बजे 

MERCURY RETROGRADE 2018 DATES AND TIMES

Generally, the planet Mercury turns Retrograde three or four times in a year. The exact dates and time of the Mercury Retrograde in 2018 are:

23 March 2018 (Friday) 5:49 A.M. – 15 April 2018 (Sunday) 2:50 P.M.
26 July 2018 (Thursday) 10:32 A.M. – 19 August 2018 (Sunday) 9:55 A.M.
17 November 2018 (Saturday) 7:04 A.M. – 7 December 2018 (Friday) 2:52 A.M. 

SIGNIFICANCE OF MERCURY RETROGRADE (BUDDH VAKRI)

Buddh (Mercury) has a strong influence on intelligence, speech, logical reasoning, decision making, writing, business and statistics. Generally if a planet retrogrades, the effects it produces are magnified. Hence, the person’s mental capabilities also become sharper, one becomes more hard working and the person’s overall efficiency increases.

Mercury generally has good effects on other planets. But when it becomes retrograde, its influence becomes even stronger. In case Mercury has negative influence on any planet, then the Mercury retrograde can lead to serious consequences. If Mercury is at a very high position, the Mercury retrograde produces excellent results. A person with such planetary position can expect a sudden gain of wealth.

Effect of Mercury Retrograde on Profession

Mercury directly influences profession and career; hence if Mercury retrograde, Mercury transit, or Mercury direct happens, then it will naturally affect business or professional life. In Vedic astrology, strong Mercury has a positive effect on career and profession. On the other hand, weak Mercury causes a financial slowdown or business losses.

Increase in Intelligence and Thinking Power

Mercury has a strong influence on a person’s mind. Hence, Mercury retrograde can sharpen the person’s intellectual and thinking abilities. The person gains far-sightedness and his/her interest in psychological and philosophical matters increases. It is generally said that people with a strong influence of Mercury at birth possess great reasoning and logical thinking skills, and are good at diplomacy and public affairs. They do especially well in astrology or fortune-telling professions.

वक्री बुध का महत्व

बुध ग्रह बुद्धि, संवाद, संचार, बौद्धिक कौशल, निर्णय लेने की क्षमता, लेखन, व्यापार और सांख्यिकी का कारक होता है। जब भी कोई ग्रह वक्री होता है तो उसके चेष्टा बल में वृद्धि होती है। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति का सामर्थ्य बढ़ता है और वह अधिक परिश्रम करता है। किसी राशि में सामान्य रूप से शुभ फल देने वाला बुध, वक्री होने की स्थिति में और अधिक तीव्रता से उत्तम फल प्रदान करता है। वहीं किसी राशि में सामान्य रूप से अशुभ फल देने वाला बुध, वक्री होने की स्थिति में कुछ बुरे परिणाम दे सकता है। यदि कुंडली में बुध अत्यंत उच्च स्थिति में हो तो वक्री बुध लाभ भी देता है। इस ग्रह योग वालों को अचानक कहीं से धन प्राप्ति के योग बनते हैं।

वक्री बुध का व्यापार पर असर

बुध ग्रह व्यापार का कारक होता है, इसलिए बुध के वक्री, मार्गी और अस्त होने से कारोबार पर भी असर पड़ना स्वभाविक है। वैदिक ज्योतिष में शक्तिशाली बुध व्यापार में सफलता प्रदान करता है। वहीं निर्बल और वक्री होने पर बुध व्यापार में मंदी और अर्थव्यवस्था में गिरावट को दर्शाता है।

बुद्धि और विवेक में वृद्धि

बुद्धि और विवेक का कारक कहे जाने वाले बुध के जन्मकुंडली में वक्री होने से कई तरह की शक्तियां प्राप्त हो सकती हैं। बुध की वक्री अवधि में व्यक्ति दूरदृष्टा और मनोवैज्ञानिक विषयों में निपुणता प्राप्त करता है। कहते हैं कि जन्म के समय जिन लोगों की कुंडली में बुध वक्री होता है, वे लोग संकेत और कूट रचना की भाषा समझने में निपुण होते हैं। इसके अतिरिक्त वे ज्योतिषी या भविष्यवक्ता भी बन सकते हैं।


वक्री बुध के प्रभाव

बुध के वक्री होने का सबसे अधिक प्रभाव मनुष्य के व्यवहार और स्वभाव पर पड़ता है। इसके फलस्वरुप व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव देखने को मिलते हैं। वक्री बुध व्यक्ति की बातचीत करने की कला और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर देता है। बुध के वक्री होने के प्रभाव से व्यक्ति जीवन में कुछ अप्रत्याशित और हैरान कर देने वाले निर्णय लेने लगता है। ये फैसले परिस्थितियों के एकदम विपरीत भी हो सकते हैं। इसके परिणामस्वरुप निर्णय लेने के बाद व्यक्ति पछतावा करने लगता है।

  1. यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली के प्रथम भाव में बुध वक्री होता है, तो वह व्यक्ति तेज गति से कार्य करता है, लेकिन कभी-कभी यही जल्दबाजी उसके लिए हानिकारक साबित होती है। क्योंकि ये लोग बिना विचार किये निर्णय लेते हैं और फिर नुकसान उठाते हैं।
  2. वहीं अगर जन्मकुंडली के द्वितीय भाव में बुध वक्री होता है, तो वह व्यक्ति अपने बौद्धिक कौशल से बहुत धन अर्जित करता है। इसके अलावा यदि वक्री बुध की दृष्टि अष्टम भाव पर हो तो, व्यक्ति धार्मिक, आध्यात्मिक और दार्शनिक प्रवृत्ति का बनता है। वहीं तीसरे भाव में वक्री बुध व्यक्ति को साहसी बनाता है।
  3. कुंडली के चतुर्थ भाव में बुध के वक्री होने पर व्यक्ति राजशा